Sunday, July 05, 2009

सबब

कुछ महका हैं कुछ बहका हैं
तेरा रूप आज किस झरने से छलका हैं?
खफा ना होना की मैंने तुमसे कुछ कहा
आज ये मन तो बस हल्का हैं

तुम हमेशा किसी झोंके की तरह जाती हो
मैं खयालो में खोया रहता हूँ - और तुम छुं जाती हो,
अच्छा हैं के तुम बस ऐसी ही राहों
इन ख़यालों को भी तो पता चले तुम कैसी हो

ये समां जो तुम संग लाती हो
क्या कहीं कोई निशानी भी छोड़ जाती हो?
नहीं मुझे यादों मे नहीं जीना
बस कह दो की तुम्हारे आने में - मेरा सबब पाती हो

No comments: