दिल बहलाने को
ख़याल तो बहोत हैं
मगर बहलाने का ख़याल
छोड़ दो - तो क्या बाकि।
गुजरते हुए इस वक्त के
मकाम तो बहोत हैं
मगर चंद लम्हों की
इस जिंदगी मैं क्या बाकि ।
कोई हमदर्द मील भी जाए
चलने को ये रास्ता
मगर मंजिल ही न हो
तो दर्द क्या बाकि ।
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