कह भी दूँ तुम्हे
पर मतलब क्या होगा?
वही पुराना दौर
और क्या होगा?
रोक रखा हैं मैंने
इस दिल को,
नासमझ यूं
धड़कने से क्या होगा?
गलियां नई होती हैं
पर शीशा तो वही,
यूं बेकारा
दीवानगी से क्या होगा?
आरजू कोई ये
आज की नहीं,
फिर दोहराने से
नया क्या होगा?
हर दिन तो
सूरज अलग हैं,
पर शाम से हैं जो वास्ता,
उसका क्या होगा?
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