मेरे गम पर हस रहे हो
पर ये दुवा ले लो मुझसे
की तुम खुदको
कभी न पाओ यहाँ
ज़िन्दगी के बहोतसे मायने हैं
उन सबको छोड़
कभी न आओ यहाँ।
कोई बात नहीं के
तुम्हें ये महसूस न हो
के जलती हैं रोशनी कैसे
बस दिया होता हैं कोई
जो अंधियारे को मिटा दे
इतनी ही तुम
गुफ्तगू करो।
मौसम खड़ा अपने आप को
कितना बदल लेता हैं
कोई पत्थर हैं
जिस पर नया रंग पोत दो
खुशहाल होगा सब कुछ
आती जाती हवां से
कुछ पुछने की परवाह न करो।
राह भुल तुमने
जो आज कुछ देख लिया हैं
सुबह उठते सब भुल जाओ
हर दामन यूँ ही
हाथ नहीं आता
बस इतना जान लो
और कुछ जानने की
फिक्र न करो।
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