अभी कुछ चाहा भी तो नहीं तुमसे
और तुम दिल मांगते हो मेरा
भरा बाज़ार हैं यहाँ
कोई किमत भी तो लगाते जरा।
जाँ छिड़कने की बात करते हो
पर हासील हमे कुछ भी तो न होगा
हाँ कत्ल का जुर्म जरूर ढोयेंगे
क्या कोई खुदा नहीं मेरा।
नहीं नहीं हम पत्थर नहीं
पर ये दिल हैं मेरा
तुफां पर में संवार हो भी जाऊँ
पर ये समन्दर हैं तो तेरा।
खफां और नाराज़ तुम हो रहें हो
जैसे बेवाफाएं हमने की हो
नहीं ओ मेरे दुश्मन
तेरा नाम अब दुजा न होगा।
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