आज रुसवे की रात ही सहीं
पर जवाब तो जरूर लेंगे
अब मिटना और क्या बाकि रहां
पर बुझते हुए थोडी आग और देंगे
खामोशी को तो हमने हमेशा हैं समझा
थोड़े जजबाती आज बेशक होंगे।
लम्हे हमने नहीं गिने कभी
की जिंदगी तो उनमे ही जी हैं
तेरा जिक्र था जहाँ भी
बस वहीँ बसने की फिक्र की हैं
जब तुम अब फेर रहें हो नजर को
भूल जाते हो हमने तेरे इश्क मैं कितनी जदेद्जोहत की हैं।
किसी पे अहसान तो नहीं इश्क करना
की चुकता करने की कीमत नहीं हैं
बस दिल का मामला हैं चाहत
जो जुड़ गए तो मौत ही पी हैं
अगर हम प्यासे रहें तो सवाल न था
पर तुम्हे हमारी वफाओं पे क्या कोई शिकायत हुई हैं।
पर ये जो परदा सर पे लिए घूमते हो अब
किस जानशीन से तुमने रुखसत ली हैं
अगर दीवानगी पे हमारी भरोसा न रहां
तो किस मयखाने मैं तुमने शिरकत की हैं
ए साकी ये तो बताते जा
क्या तुमने कभी मोह्हबत की हैं -
यूँ तो जमाना दीवाना हैं तेरा
पर मेरे बाद किसको सताने की
तुमने आज कसम ली हैं।
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